निकलते है लब्जों से मोती ,
इस तरह, के
बहाने के लिए आखों में
कुछ भी नही है .....
होश नही सँभालते ,
संभाले अभी, के
बेहोशी में हाले दिल ,
सुनाये बैठे है ....!!
हाले दिल भी किसे सुनाये ,
जब सुनाने वाला कोई ना हो ,
समजने वाला कोई ना हो ,
बस चारों तरफ़ खामोशी हो ,
हर तरफ़ तन्हाई हो ,
ना तुम हो , ना हम हो ,
दुवाए भरी बातें हो ,
और मीठी सी यादें हो ...........!!
सिर्फ़ तुम्हारी और हमारी ........!!!
हाले दिल कभी , ऐसा किसी का ना हो , ये दुवा करते है उसीसे ,
जिसने मिलाया हमे तुम्हीसे ,
और तुमको हमसे ......!!!
हाले दिल .......!!
Friday, May 15, 2009
फिर वही सुबह...
फिर वही, सुबह आखों में आंसू आए ,
यादों की धुन्द्लीसी दस्तक लाये ,
लगा के दिल रो रहा है कोई ,
आस पास देखा तो कोई नही ,
ऐसा लगा लूट गया हो कोई ............
फिर वही सुबह , फिर वही खामोशी .....
छाई इस दिल में .........
ऐसा लगा कैसे कटेगी .....
जिन्दगी इस महेफिल में ......
कोंन आयेगा इस दिल को थामने ....
या .... फिर वही सुबह आयेगी ....
आखों के सामने .....
फिर वही खामोशी , फिर वही तन्हाई लेके ....
यादों की धुन्द्लीसी दस्तक लेके ...
और टूटे हुवे सपनो की मिठीसी यादें लेके.
आओ दुआ करते है ......
ऐसी सुबह किसी को न मिले .....
सभी प्यार भरे दिल मिले ....
सभी दिलोंके सपने खिले ....
तुटेना किसी का दिल कोई ...
फिर वही खामोशी, और तन्हाई लेके ...
फिर वही सुबह आए न कोई....
यादों की धुन्द्लीसी दस्तक लाये ,
लगा के दिल रो रहा है कोई ,
आस पास देखा तो कोई नही ,
ऐसा लगा लूट गया हो कोई ............
फिर वही सुबह , फिर वही खामोशी .....
छाई इस दिल में .........
ऐसा लगा कैसे कटेगी .....
जिन्दगी इस महेफिल में ......
कोंन आयेगा इस दिल को थामने ....
या .... फिर वही सुबह आयेगी ....
आखों के सामने .....
फिर वही खामोशी , फिर वही तन्हाई लेके ....
यादों की धुन्द्लीसी दस्तक लेके ...
और टूटे हुवे सपनो की मिठीसी यादें लेके.
आओ दुआ करते है ......
ऐसी सुबह किसी को न मिले .....
सभी प्यार भरे दिल मिले ....
सभी दिलोंके सपने खिले ....
तुटेना किसी का दिल कोई ...
फिर वही खामोशी, और तन्हाई लेके ...
फिर वही सुबह आए न कोई....
कोशिश...
कोशिश कर रहा हु...
जीने की तुम बिन...
दर्द भरे कटते है ,
अब रात और दिन...
पता है कोई नही आयेगा...
साथ निभाने को...
खाली हाथ थामने को...
तन्हाई और खामोशी मिटाने को...
फिर भी कोशिश जारी है जीने की...
जीना जरूरी है इसीलिए ...
अब कों जीना चाहता है अपने लिए ,
जब मंजिले ही ना हो जीने के लिए ...
अब तो जीना सिर्फ़ उसी मंजिल के लिए ...
जो नही है अब हमारे लिए ...
फिर भी ना जाने क्यों ....?????
कोशिश करता है दिल उसी मंजिल को पाने के लिए...
कोशिश ....कोशिश ...कोशिश ....
सिर्फ़ ... कोशिश ...!!
जीने की तुम बिन...
दर्द भरे कटते है ,
अब रात और दिन...
पता है कोई नही आयेगा...
साथ निभाने को...
खाली हाथ थामने को...
तन्हाई और खामोशी मिटाने को...
फिर भी कोशिश जारी है जीने की...
जीना जरूरी है इसीलिए ...
अब कों जीना चाहता है अपने लिए ,
जब मंजिले ही ना हो जीने के लिए ...
अब तो जीना सिर्फ़ उसी मंजिल के लिए ...
जो नही है अब हमारे लिए ...
फिर भी ना जाने क्यों ....?????
कोशिश करता है दिल उसी मंजिल को पाने के लिए...
कोशिश ....कोशिश ...कोशिश ....
सिर्फ़ ... कोशिश ...!!
बारिश....
एक ऐसी बारिश देखि हमने ,
एक ऐसी बारिश महेसुस की ....
बारिश तो वही थी ,
सिर्फ़ बुँदे आंसुओं की थी ...
ऐसा लगा , आंसू उधर दे गया हो कोई ,
सारे गम लूटने को ...
सारी यादें मिटने को ...
सुना था भिगोती है बारिश ,
दुनिया के महेफिलों को ...
यहाँ तो ख़ुद भीगी है बारिश ,
भिगोके हमारे अरमानो और सपनो को ..
हमने हर एक आंसू परख के देखा ..
हर एक आंसू हस रहा था मेरी और अपनी किस्मत पे ..
ना तो वो ख़ुद अपना था , ना पुरा मेरा ....
उसमे तो मिला था उसका भी उधास चेहरा ..
जो रो रहा था मेरी और अपनी किस्मत पे ..
क्यों देता है खुदा ऐसी ....
बारिश बन्दों को ,
क्यूँ मिलाता है उनको ,
जिनके मुक्कद्दर में ऐसी बारिश हो ..
शायद सोचा हो उसने भी कुछ ...
भला अपने बन्दों का ...
अब सहेना ही पड़ेगा ...
और कहेना पड़ेगा ..
बारिश ही तो है ..
आंसुओं की ही सही.........!
एक ऐसी बारिश महेसुस की ....
बारिश तो वही थी ,
सिर्फ़ बुँदे आंसुओं की थी ...
ऐसा लगा , आंसू उधर दे गया हो कोई ,
सारे गम लूटने को ...
सारी यादें मिटने को ...
सुना था भिगोती है बारिश ,
दुनिया के महेफिलों को ...
यहाँ तो ख़ुद भीगी है बारिश ,
भिगोके हमारे अरमानो और सपनो को ..
हमने हर एक आंसू परख के देखा ..
हर एक आंसू हस रहा था मेरी और अपनी किस्मत पे ..
ना तो वो ख़ुद अपना था , ना पुरा मेरा ....
उसमे तो मिला था उसका भी उधास चेहरा ..
जो रो रहा था मेरी और अपनी किस्मत पे ..
क्यों देता है खुदा ऐसी ....
बारिश बन्दों को ,
क्यूँ मिलाता है उनको ,
जिनके मुक्कद्दर में ऐसी बारिश हो ..
शायद सोचा हो उसने भी कुछ ...
भला अपने बन्दों का ...
अब सहेना ही पड़ेगा ...
और कहेना पड़ेगा ..
बारिश ही तो है ..
आंसुओं की ही सही.........!
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