Friday, May 15, 2009

कोशिश...

कोशिश कर रहा हु...
जीने की तुम बिन...
दर्द भरे कटते है ,
अब रात और दिन...

पता है कोई नही आयेगा...
साथ निभाने को...
खाली हाथ थामने को...
तन्हाई और खामोशी मिटाने को...

फिर भी कोशिश जारी है जीने की...
जीना जरूरी है इसीलिए ...

अब कों जीना चाहता है अपने लिए ,
जब मंजिले ही ना हो जीने के लिए ...
अब तो जीना सिर्फ़ उसी मंजिल के लिए ...
जो नही है अब हमारे लिए ...

फिर भी ना जाने क्यों ....?????
कोशिश करता है दिल उसी मंजिल को पाने के लिए...


कोशिश ....कोशिश ...कोशिश ....
सिर्फ़ ... कोशिश ...!!

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