Friday, May 15, 2009

फिर वही सुबह...

फिर वही, सुबह आखों में आंसू आए ,
यादों की धुन्द्लीसी दस्तक लाये ,
लगा के दिल रो रहा है कोई ,
आस पास देखा तो कोई नही ,
ऐसा लगा लूट गया हो कोई ............

फिर वही सुबह , फिर वही खामोशी .....
छाई इस दिल में .........
ऐसा लगा कैसे कटेगी .....
जिन्दगी इस महेफिल में ......

कोंन आयेगा इस दिल को थामने ....
या .... फिर वही सुबह आयेगी ....
आखों के सामने .....
फिर वही खामोशी , फिर वही तन्हाई लेके ....
यादों की धुन्द्लीसी दस्तक लेके ...
और टूटे हुवे सपनो की मिठीसी यादें लेके.

आओ दुआ करते है ......
ऐसी सुबह किसी को न मिले .....
सभी प्यार भरे दिल मिले ....
सभी दिलोंके सपने खिले ....

तुटेना किसी का दिल कोई ...
फिर वही खामोशी, और तन्हाई लेके ...
फिर वही सुबह आए न कोई....

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